patanjali divya shuddhi churna benefits

शुद्धि चूर्ण क्या है : शुद्धि चूर्ण या पतंजलि दिव्य शुध्दि चूर्ण एक आयुर्वेदिक दवा (चूर्ण ) है जो पेट के विकारों के लिए उपयोगी है। यह पाचन से सबंधित विकारों को दूर करता है यथा गैस, अजीर्ण, खट्टी डकार, क्रोनिक कब्ज आदि। यह आँतों की सफाई करने का श्रेष्ठ चूर्ण है। इसमें मिलाई गयी सामग्री आयुर्वेदिक हर्ब है जो कब्ज जनित व्याधियों को दूर करने का असरदार माध्यम हैं।
शुद्धि चूर्ण के घटक अवयव : शुद्धि चूर्ण में आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर हर्ब का उपयोग किया जाता है जो क्रोनिक कब्ज को दूर करने में असरदार हैं। आइये इस विषय में जानते हैं की इसमें कौनसी सामग्री का उपयोग हुआ है और उनके गुण धर्म क्या हैं। शुद्धि चूर्ण में हरड़, भरड़, भूमि आवला, जीरा, टंकण भस्म, हींग और इन्द्रायण का उपयोग किया जाता है।

हरड़ (हरीतकी) Terminalia chebulaआयुर्वेद के अनुसार हरीतकी के सात प्रकार होते हैं, जिन्हें चेतकी हरड़ , अभ्या हरड़, रोहिणी हरड़, बड़ी हरड़, काली हरड़ तथा पीली हरड़ के रूप में जाना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार हरड़ में लवण रस को छोड़कर शेष सभी रस होते हैं। हरड को हरीतकी भी के नाम से भी जाना जाता है। हरीतिकी के पेड़ से प्राप्‍त सूखे फल है जिन्‍हें हरड़ कहा जाता है। हरीतकी (Haritaki) का वानस्पतिक या वैज्ञानिक नाम टर्मिनालिया केबुला (Terminalia chebula) है। इसके अन्य नाम हैं हरड, कदुक्‍कई, कराकाकाया, कदुक्‍का पोडी, हर्रा और आयुर्वेद में इसे कायस्था, प्राणदा, अमृता, मेध्या, विजया आदि नामों से भी जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे अत्यंत ही लाभकारी माना जाता है। पेट से सबंधित व्याधियों जैसे की अपच, पाचन शक्ति का दुर्बल होना, बवासीर होना दस्त आदि में इसका उपयोग असरदायक होता है। हरड विटामिन C का एक अच्छा स्रोत होता है। चरक सहिता में हरड के गुणों के बारे में उल्लेख मिलता है। हरड़ की तासीर गर्म होती है।

भरड़ (बहेड़ा) Terminalia belliricaबहेड़ा एक ऊँचा पेड़ होता है और इसके फल को भरड कहा जाता है। बहेड़े के पेड़ की छाल को भी औषधीय रूप में उपयोग लिया जाता है। यह पहाड़ों में अत्यधिक रूप से पाए जाते हैं। इस पेड़ के पत्ते बरगद के पेड़ के जैसे होते हैं। इसे हिन्दी में बहेड़ा, संस्कृत में विभीतक के नाम से जाना जाता है। भरड पेट से सम्बंधित रोगों के उपचार के लिए प्रमुखता से उपयोग में लिया जाता है। यह पित्त को स्थिर और नियमित करता है। कब्ज को दूर करने में ये गुणकारी है। यह कफ को भी शांत करता है।

भरड एंटी ओक्सिडेंट से भरपूर होता। अमाशय को शक्तिशाली बनाता है और पित्त से सबंदित दोषों को दूर करता है। क्षय रोग में भी इसका उपयोग किया जाता है। भरड में कई तरह के जैविक योगिक होते हैं जैसे की ग्‍लूकोसाइड, टैनिन, गैलिक एसिड, इथाइल गैलेट आदि जो की बहुत लाभदायी होते हैं।

भूमि आंवला : भूमि आंवला (Neotea Keelanelli) को भुई आंवला और भू धात्री भी कहा जाता है। यह एक छोटा सा पौधा होता है जो यहां वहां स्वतः ही उग जाता है। इसके जो फल लगते हैं वे छोटे आंवले के समान लगते हैं इसलिए इन्हे भूमि आंवला कहा जाता है क्योकि ये भूमि के समीप होते हैं। इसका स्वाद चरपरा और कसैला होता है। शरीर से विषाक्त और विजातीय प्रदार्थों को यह शरीर से बाहर निकाल देता है। खांसी और कफ का नाश करता है साथ ही लिवर को भी मजबूत करता है। मुंह से सबंधित विकारों को भूमि आंवले से दूर किया जाता है यथा मुँह का इन्फेक्शन और छाले। यह शरीर की हीलिंग पावर को बढ़ता है और एंटी बैक्ट्रियल होता है। यह आँतों की सफाई करता है जिससे पेट से जनित मुंह के विकारों में आराम मिलता है।

जीरा Cumin : जीरा, जिसका हम सब्जी में तड़का देते हैं उसके कई औषधीय गुण भी हैं। जीरा का औषधीय उपयोग भी है। जीरा पाचन तंत्र को सुधरता है। जीरे में पाए जाने वाले कई गुण पाचन तंत्र को सुधारते हैं। जीरे में थायमाल जैसे ऑयल होते हैं जो सेलिवरी ग्लेंड्स को उत्तेजित कर पाचन तंत्र में सहयोग करते हैं। जीरे में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स और पोषक तत्व पाचन की क्रिया को मजबूत बनाते हैं। आप जीरे की चाय का सेवन कर सकते हैं और आप जीरे को महीन पीस कर उसमे आंवले और अजवाईन को पीस कर उस में काला नमक मिला कर सेवन करने से
अजीर्ण और गैस की समस्या दूर होती है।

टंकण भस्म : टंकण भस्म बोरेक्स (Borax) से तैयार एक आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन है। सुहागा या टंकण भस्म का उपयोग वैसे तो कई विकारों को दूर करने में किया जाता है लेकिन इस चूर्ण में इसके वात नाशक गुणों के लिए किया जाता है। यह पुराने से पुराने कब्ज को भी समाप्त करता है। यह लिवर से सबंधित विकारों और पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है। प्रधान गुणों में यह वात और कफ को शांत करता है। टंकण भस्म पाचक, एंटी इंफ्लामेन्ट्री, संकोचक और मूत्रल होती है।

हींग : आमतौर पर हींग (Asafoetida) को गरिष्ठ भोजन के भगार के साथ उपयोग करने का कारण यही है की यह गैस नाशक है और पाचन में सहयोगी होती है। हींग के सेवन के कई लाभ होते हैं क्योंकि हींग मेंजैसे कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, केरोटीन, राइबोफ्लेविन और नियासिन आदि लाभदायक विटामिन और खनिज होते हैं। घरों में हींग का प्रयोग कब्ज दूर करने, गैस को समाप्त करने के लिए किया जाता रहा है। इसकेअलावा शरीर में दर्द होने और दांतों के दर्द के लिए भी हींग का उपयोग किया जाता है।

इन्द्रायण : Citrullus colocynthis (Linn.) Schrad. (सिटुलस् कोलोसिन्थिस्) इन्द्रायण को क्षेत्रीय भाषा में गड़तुम्बा भी कहा जाता है। इसका फल बेल के लगता है तो तरबूज के ही परिवार से सबंध रखती है। इसके अन्य नाम हैं चित्रफल, इंद्रवारुणी गडूम्बा, पापड़, पिंदा आदि। वैसे तो इन्द्रायण के उपयोग शुगर, बवासीर, त्वचा विकारों को दूर करने, सूजन दूर करने, आँतों के कीड़े मारने, आदि में किया जाता है लेकिन इस चूर्ण में इसका उपयोग कब्ज को दूर करने, लिवर के विकार दूर करने के लिए प्रधानता से किया जाता है। इंदरायण तिरावरेचक, कफ और पित्त विनाशक, वात रोगों में उपयोगी, प्लीहा और उदररोगों में बहुत लाभदायी होता है। इस फल के गूदे को सुखाकर उसका औषधीय उपयोग किया जाता है।

बगैर चिकित्सक के इसका उपयोग करना हानिप्रद होता है।


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